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श्री विघ्नहरापहार पार्श्वनाथ

 

श्री विघ्नहरापहार पार्श्वनाथ – मोटा पोसिना तीर्थ

 

कहा जाता है, विक्रम की तेहरवी सदी में यह प्रतिमा यहाँ पेड़ के नीचे भूगर्भ से प्रकट हुई थी| श्री कुमारपाल राजा ने मंदिर का निर्माण करवाकर इस प्रभु प्रतिमा को प्रतिष्टित करवाया था – ऐसी कींवदंती है|

यहाँ उपलब्ध शिलालेखों में उत्कीर्ण उल्लेखानुसार वि.सं. १४८१ में इस तीर्थ का जिणोरद्वार हुआ था| इससे यह तो सिद्ध हो जाता है की यह तीर्थ पंद्रहवी सदी पूर्व का है| तत्पश्चात विक्रम की सत्रहवी सदी में आचार्य श्री विजयदेवसूरीश्वर्जी के समय पुन: जिणोरद्वार होने का उल्लेख है|

यह एक प्राचीन तीर्थ स्थान है जिससे इसकी मुख्य विशेषता है| प्रति वर्ष ज्येष्ठ कृष्ण ११ को ध्वजा चढ़ती है, तब अनेकों यात्रिगन इकटे होकर प्रभु-भक्ति का लाभ लेते है|