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श्री वज्रसेनसूरीजी म.सा.

 

श्री वज्रसेनसूरीजी म.सा.

 

वज्रसेनसूरीजी की पाट परंपरा में वज्रसेनसूरीजी आए| ये वज्रस्वामी से उम्र में व दीक्षा में बड़े थे| बारह वर्ष का दुष्काल पड़ने पर वज्रस्वामी ने रथवर्तगिरी पर अनशन किया तब उन्होंने वज्रसेनसूरीजी को अनशन करने से रोकम क्योंकि उन्होंने अपने ज्ञात बल से उन्हें अपनी पात परंपरा को संभालने के लिए योग्य जाना|

युगप्रधान भद्रगुप्तसूरी ने कहा था की जो भी एक रात वज्रस्वामी के साथ रहेगा वह उनके साथ ही अनशन करेगा परन्तु वज्रसेनसूरीजी ने ऐसा नहीं किया क्यूंकि वे वज्रस्वामीजी से पहले जन्मे थे व संयम भी उनसे पहले अंगीकार किया था| वज्रस्वामी की भविष्यवाणीके अनुसार सोपारक नगर में जिनदत्त क्षेष्ठी के घर लाख सुवर्ण मोहर से ख़रीदे चावल जो जहर मिलाए थे, वज्रसेनसूरीजी गोचरी गए तब क्षेष्ठी ने कहा की दुष्काल है इसलिए मै व मेरा पूरा परिवार विषमिश्रित चावल खाकर आत्महत्या कर रहे है| तब उन्होंने कहा की ऐसा मत करो, कल से सुकाल हो जाएगा|

तब सेठ ने कहा की ऐसा हुआ तो हम सभी दीक्षा लेंगे व दुसरे दिन सुकाल होने ने दीक्षा ली| आपके समय में मंदसौर में तीसरी आगम वाचना हुई व वज्रस्वामी के पास साड़े नौ पूर्वो का अध्ययन किए हुए आर्यरक्षितसूरीजी ने आगमो को चार अनुयोगों में विभाजित किया| गोष्ठामाहिल नामक सातवां नीन्हव व दिसंबर मत की उत्पति भी इसी समय में हुई थी| दुर्बलीकापुष्पमित्रादी अनेक धुरंधर आचार्य भी आपके समय में हुए| आपका जन्म वीर संवत ४९२ में हुआ, दीक्षा ५०१ में व ६२० में १२९ वर्ष की आयु में स्वर्गवास हुआ| सम्पूर्ण श्रमण संघ में आपका ११९ वर्ष का चारित्र पर्याय सर्वाधिक है|