श्री मंडोवरा पार्श्वनाथ – मुंडवा तीर्थ (सोजत)
सोजत से १२ मिल व चंडावाल से ४ की.मी. दुरी पर आया मुंडावा तीर्थ अत्यंत ही प्राचीन व मनोहर है| यहाँ जैन का एक घर नहीं है| चंडावल जैन संघ इस तीर्थ की व्यवस्था करता है| मुलनायक प्रभु १२.५ इंच ऊँचे व १० इंच चौड़े है|
इस तीर्थ की उत्पति के पीछे एक कींवदंती प्रसिद्ध है| इस गाँव के एक श्रावक को प्रभुदर्शन के बाद ही भोजन करने का नियम था| इस नियम पालान हेतु वह रोज ५ मिल दूर गाँव में जाता था| उसकी नियम निष्ठा से प्रसन्न हुए अधिश्ठायक देव ने स्वप्न में दर्शन दिए| गाँव बाहर केरडे के वृक्ष नीचे पार्श्वप्रभु के मनोहर बिम्ब का संकेत दिया और उसे नवीन मंदिर बनाने का आदेश दिया|
स्वप्न निर्देशनुसार उस श्रावक को वृक्ष के नीचे पार्श्व प्रभु की प्रतिमा प्राप्त हुई| मंदिर निर्माण हेतु धन की आवश्यकता थी| देव के संकेतनुसार उसने जैसे भरा टोपला लेकर निर्दिष्ट स्थान में रख दिया| सुबह होते ही सभी जौ सोने के हो गए| बस, उसी सुवर्ण का व्यव कर इस मंदिर का निर्माण कराया गया|
मुंडाव-मंडन पार्श्वनाथ प्रभु मंडोवरा पार्श्वनाथ के नाम से प्रख्यात हुए| पौष दशमी के दिन यहाँ मेला भी लगता है|
