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श्री भद्रेश्वर पार्श्वनाथ

 

श्री भद्रेश्वर पार्श्वनाथ – भद्रेश्वर तीर्थ

 

कच्छ में आए भूकंप के कारण भद्रेश्वर तीर्थ को हानि होने से उस तीर्थ के पुन: उद्धार का अकार्य चल रहा है| जिणोरद्वार के पूर्व भद्रेश्वर तीर्थ में २५ वि देरी में पुराने मुलनायक पार्श्व प्रभु बिराजमान थे| ये प्रभुजी फने रहित २७” ऊँचे थे|

महावीर प्रभु ने अस्तित्व काल में “भद्रावती ” के नाम से प्रक्यात यह नगरी “भद्रेश्वर” के नाम से प्रसिद्ध है|

इतिहास में प्रसिद्ध विजय सेठ और सेठानी की जन्मभूमि भी यही भद्रेश्वर तीर्थ थी|

उसी नगर के देवचंद क्षेष्ठी ने वीर प्रभु के निर्वाण के २३ वर्ष बाद पार्श्वनाथ प्रभु का देव विमान तुल्य मंदिर बंधाया था और कपिल केवली के हाथ से प्रतिष्ठा कराई थी|

काल के प्रवाह में इस तीर्थ पर भी कई बार आक्रमण हुए| संप्रति, कुमारपाल, वास्तुपाल आदि ने भी तीर्थ का जिणोरद्वार कराया था|

जगडूशा ने भी इस तीर्थ के विकास के लिए खूब योगदान दिया था| इसके बाद किसी बाबा ने इस तीर्थ पर कब्ज़ा पर पार्श्वप्रभु की प्रतिमा को कहीं छुपा दी|

वि.सं. १६२२ में इस तीर्थ का पुन: उद्धार हुआ और मुलनायक के रूप में महावीर प्रभु को बिराजमान किया गया| वर्षो बाद पार्श्वनाथ प्रभु की वह प्रतिमा बाबा के पास से पुन: प्राप्त हुई|

वि.सं. १६८२ में इस तीर्थ का पुन: जिणोरद्वार हुआ| १९४९ में हुए मुस्लिम आक्रमण से इस तीर्थ को काफी नुक्सान पहुचा|

सं. १८८० में वापस इस तीर्थ का उद्धार हुआ| पुन: इस तीर्थ को नुक्सान पहुंचा|

वि.सं १९३९ में पुन: इस तीर्थ का जिणोरद्वार हुआ| यह तीर्थ गांधीधाम रेलवे स्टे. से ३७ की.मी. दूर है |