Welcome to Agam Nigam Website - Your complete knowledge base on Jainism, Discover Tirthankars, Scripture, Temples, and History.
Welcome to Agam Nigam Website - Your complete knowledge base on Jainism, Discover Tirthankars, Scripture, Temples, and History.
Welcome to Agam Nigam Website - Your complete knowledge base on Jainism, Discover Tirthankars, Scripture, Temples, and History.
श्री भटेवा पार्श्वनाथ
श्री भटेवा पार्श्वनाथ – चाणस्मा तीर्थ
प्रामाणिक उल्लेखो से ज्ञात होता है की इस तीर्थ की स्थापना वि. चौदहवी शताब्दी के पूर्व हुई होगी| कहा जाता है की सदियों पहले ईडर नगर के निकट भाटुआर गाँव के निवासी श्रावक सुरचंद को पूण्ययोग से यह प्रतिमा भूगर्भ से प्राप्त हुई| तत्पश्चात दिन प्रतिदिन सुरचंद श्रावक के घर में सिद्धि-सिद्धि की वृद्धि होती रही, जिससे उनकी ख्याति बढ़ने लगी| सुसंपन्न श्रावक के प्रति ईडर के राजा के दिल में इर्ष्या भाव पैदा हुआ व प्रभु-प्रतिमा की माँग करने लगा| उस पर श्रावक ने प्रतिमाजी को भूगर्भ में सुरक्षित रखा|
विष श्रीमाली कुल की वंशावली से ज्ञात होता है की श्री जयंत श्रावक ने नारेली से यहाँ अपने ससुराल के गाँव आकर किए जब अचलगच्छ के आचार्य श्री अजितसिंहसूरीजी के सदुपदेश से यहाँ सुन्दर मंदिर का निर्माण करवाकर श्री भटेवा पार्श्वप्रभु प्रतिमा की प्रतिष्ठा वीर नि.सं. १८०४ (वि.सं.) में करवाई थी|
एक उअर उल्लेख से पता चलता है की चाणस्मा के रविचन्द्र श्रावक ने यहाँ मंदिर बनवाकर वि.सं. १५३५ में इस प्रतिमा को प्रतिष्टित करवाया था| हो सकता है की उस समय पुन: उधार हुआ हो| इन सारे वृतान्तो से सिद्ध होता है की यह मनोरम प्रभु प्रतिमा अति ही प्राचीन है, कालक्रम से अनेको बार उठान-पतन होने के कारण कुछ काल तक भूगर्भ में रही होगी|
बालू से निर्मित यह प्रतिमा अति ही प्रभावशाली है| सुरचन्द श्रावक को प्रतिमा प्राप्त होते ही उनके घर में सिद्धि-सिद्धि अवर्णणीय रूप से बढ़ी थी| आज भी श्रद्धालु भक्तजनों को यह अतिशय प्रतीत होता है|
Welcome to our dedicated space for Jainism literature, news, and resources. Our mission is to preserve and share profound spiritual knowledge for the global community.