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श्री चमत्कारी पार्श्वनाथ जैन तीर्थ

bakra road tirth
मंदिर का दृश्य |

श्री चमत्कारी पार्श्वनाथ जैन तीर्थ (बाकरा रोड)


               अंग्रेजों के शासन काल में बाकरा गाँव के ठाकुर श्री धोकलसिंहजी के प्रयास  से समदड़ी-रानीवाडा रेलवे लाइन का कार्य संपन्न हुआ| उस समय संयोग से विहार करते हुए सन १९३० में आचार्यदेव श्रीमद्विजय तिर्थेन्द्रसूरीश्वर्जी म.सा. का आगमन इस क्षेत्र में हुआ| ठाकुर साहब ने भव्य स्वागत कर यहीं पर एक कमरे में ठहरने की व्यवस्था करवाई| आस-पास गांवो के लोग एवं बाकरा रोड के समस्त जाती व व्यापारीगण पूज्यश्री के प्रवचन सुनने आने लगे|

               उस समय बाकरा रोड पर चीटियाँ बहुत निकलती थी, जिससे जीव हिंसा होती थी| इस विषय में लोगों द्वारा पूछने पर गुरुदेव ने फरमाया की “यहाँ पर भविष्य में महान विशाल तीर्थ बनेगा तथा जितनी यहाँ पर निकल रही है, उतनी ही विशाल संख्या में यहाँ पार लोगों का आवगमन होगा|” उस भविष्यवाणी को आज हम यहाँ साक्षात देख रहे है|

              गुरुदेव ने यहाँ पर तिर्थेन्द्रसूरी ज्ञान भंडार की स्थापना की| गुरुदेव के दो शिष्यों, मुनि लब्धिविजयजी(लब्धिचन्द्रसूरीजी) व मुनि कमलविजयजी ने दूरदृष्टी रखकर यहाँ बड़ा भूखंड क्रय करवाया| एक बार विहार दरम्यान यहाँ पधारे तब आचार्य श्री लब्धिचंद्रसूरीजी ने इस भूमि पर नाग-नागिन के जोड़े को देखा| उसी समय उनके मन में यहाँ भगवान पार्श्वनाथ का दिव्य मंदिर बनाने की भावना हुई|

              रेवतड़ा के चातुर्मास में कार्तिक सुदी १० को गुरु जयंती के अवसर पर उन्होंने संघ समक्ष जिनालय बनाने की भावना व्यक्त की, जिसे उपस्थिति श्री संघ ने सहर्ष स्वीकार किया| एवं मात्र दो वर्ष की अल्पा विधि में चमत्कारी पार्श्वनाथ तीर्थ का निर्माण हुआ| प्रतिष्ठा आपके ही शुभहस्तों से वि.सं. २०५४ माघ सुदी ६ को संपन्न हुई| प्रतिष्ठा के दिन अधिष्ठायक नागदेवता समय पर पधारे व दिनभर गुरुभक्तों ने श्रद्धापूर्वक दर्शन का लाभ लिया| प्रतिष्ठा के बाद तीर्थ प्रगति की ओर निरंतर अग्रसर हो रहा है|

              मुनिराज श्री जयानंदविजयजी म.सा. की पावन निश्रा में वि.सं. २०६८ , दी. २०-१-२०११ को पार्श्व प्रभु के गणधर श्री शुभ स्वामी एवं आर्यघोषस्वामी की अंजनशलाका एवं प्रतिष्ठा इस तीर्थ पर संपन्न हुई| पूज्यश्री की निश्रा में उपधान, सामूहिक चातुर्मास आदि कई धार्मिक अनुष्ठान हुए, जिससे यह तीर्थ लोगों की आस्थाओं के साथ विशेष रूप से जुड़ा| आज यह तीर्थ विकास की ओर अग्रसर है|

श्री तिर्थेन्द्रसूरी स्मारक ट्रस्ट , तिर्थेन्द्र नगर, बाकरा रोड, जिला – जालोर (राज.) ३४३०२५


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