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श्री गृत कल्लोल पार्श्वनाथ
श्री गृत कल्लोल पार्शवनाथ – सुथरी तीर्थ
यह स्थल कच्छ भुज की अबडासा पंचतीर्थो का एक मुख्य तीर्थ माना जाता है| इस मंदिर की प्रतिष्ठा विक्रम सं. १८६५ वैशाख शुक्ल अष्टमी को हुई थी|
इस प्रभु-प्रतिमा का चमत्कार अति विख्यात है| कहा जाता है की श्री उदेशी श्रावक की, किस वक़्त अपने प्रवास-काल में एक ग्रामीण मनुष्य से भेट हुई| उसके पास यह प्रभु प्रतिमा थी, जिसे देखकर उदेशि श्रावक अत्यधिक हर्षित हुए व उस व्यक्ति को मुहँ माँगा धन देकर बड़े ही हर्षोल्लास व आदर-सत्कार पूर्वक प्रतिमा को अपने घर लाकर खाद-पदार्थ के भण्डार में रखा| दुसरे दिन जब प्रभु प्रतिमा के दर्शनार्थ भण्डार का दरवाजा खोला तब भण्डार को खाद पदार्थो से भरपूर देखकर उदेशी श्रावक आश्चर्य चकित हुए| गाँव में उपस्तिथि पूज्य यतिवर्य के पास जाकर घटित वृतांत कहा| उस पर यतीजी ने मंदिर बनवाकर इस चमत्कारिक प्रभु प्रतिमा की प्रतिष्टित करवाने की सलाह दी| तदनुसार उदेशी श्रावक ने भव्य मंदिर का निर्माण करवाया|
प्रतिष्ठा के शुभ अवसर पर स्वामी-वात्सल्य का आयोजन रखा गया, जिसमे एक ही बर्तन का घी आवश्यक प्रमाण में वापरने पर भी बर्तन भरा ही रहा|इस आश्चर्यमयी घटना से उपस्तिथ भक्तगन प्रभावित होकर प्रभु को गृतकल्लोल पार्श्वनाथ कहने लगे| प्रतिमा को अत्यंत हर्षोल्लास के साथ जयध्वनि के बीच विधिपूर्वक प्रतिष्टित किया गया| कहा जाता है की अभी भी अनेको बार चमत्कारिक घटनाए घटती है| जैसे हाल ही में भगवान श्री महावीर की २५वि निर्वाण शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित विराट महामोहत्सव के समय यहाँ ४ साल से लगातार अकाल होने के कारण पानी की भयंकर समस्या हो गई थी, जिससे यहाँ का संघ अति चिंतित था| उस समय एक भाग्यशाली श्रावक को स्वप्न में गाँव के बाहर तालाब के बीच ६ फुट गड्डा खोदने पर विपुल मात्रा में nirmal
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