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श्री कामितपूरण पार्श्वनाथ
श्री कामितपूरण पार्श्वनाथ – उन्हेल
उज्जैन से रतलाम मार्ग पर आए उन्हेल रेलवे स्टेशन से १० की.मी. से दूर उन्हेल गाँव है, जहाँ कामितपूरण पार्श्वनाथ प्रभु का भव्य जिनालय है| २५” ऊँचे व २३” चौड़े सात फनों से युक्त श्याम वर्णीय ये प्रतिमाजी लगभग २००० वर्ष प्राचीन है|
“तोरण” नाम की उत्पति के संबंध में एक दंत कथा प्रसिद्ध है| नागदा में जनमेजय में नाग यज्ञ किया था| उस यज्ञ के प्रसंग पर चारों दिशाओं में तोरण द्वारा बांधे गए थे| उस समय यहाँ भी तोरणद्वार बांधा गया था| कालक्रम से वहां बसा नगर “तोरण” के नाम से प्रसिद्ध बना, जो बाद में आज “उन्हेल” के नाम से प्रसिद्ध है|
गुप्तकालीन अवशेषों से इस नगर की प्राचीनता का ख्याल आता है|
इस प्राचीन तीर्थ के अनेक बार उद्धारक भी हुए| वि.सं. १८९८ में इस तीर्थ की पुन: प्रतिष्ठा हुई थी| वि.सं. २०२० में वापस जिणोरद्वार हुआ और प्रतिष्ठा हुई|
प्रतिमाजी के ऊपर दोनों और धरनेंद्र और पद्मावती की भी प्रतिमा है| प्रतिमाजी अत्यंत ही सुन्दर व महमोहक है|
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