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श्री आर्यमहागिरीजी म.सा.

 

श्री आर्यमहागिरीजी म.सा.

 

आप श्री स्थूलीभद्रसूरीजी के शिष्य व पट्टधर थे| आप यक्षा साध्वी के आश्रय में पलकर बड़े हुए इसलिए आपको आगे शब्द जोड़ा जाता है| आप ११ अंग व १० पूर्व ज्ञानी थे| आपकी दीक्षा ३० वर्ष की वय में हुई थी व ७० वर्ष संयम का पालन किया था| जिसमें ४० वर्ष तक युगप्रधान रहे| आप महान साधक व जिनकल्प का विचेद्ध होने के बाद भी कर्म की निर्जरा के लिए जिनकल्प की तुलना करते थे| अंत में आप गजेंद्र पर्वत पर अनशन कर व १०० वर्ष का आयुष्य पूर्ण कर स्वर्ग सिधारे|