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प.पू. मुनिराजश्री जयानंद विजयजी को आचार्य पदवी
प.पू. मुनिराजश्री जयानंद विजयजी को आचार्य पदवी १२ जून को
बाकरा रोड : सौधर्म बृहतपोगच्छीय त्रिस्तुतिक जैन संघ परंपरा के आचार्यदेव श्रीमद्विजय विधाचन्द्र सूरीश्वरजी म.सा. के शिष्यरत्न शुद्ध क्रिया पालक प.पू. मुनिराज्श्री जयानंदविजयजी म.सा. को प्र. आषाढ़ वदी शुक्रवाद दी. १२-०६-२०१५ के शुभ दिन श्री चमत्कारी पार्श्वनाथ जैन तीर्थ , बाकर रोड (जी.जालोर) में आचार्य पद से अलंकृत किया जायेगा| पिछले कई वर्षो से विभिन्न श्री संघो द्वारा आचार्यपद ग्रहण करने हेतु निवेदन जारी था|
६ अप्रैल को भीनमाल में विविध त्रिस्तुतिक जैन संघो के सदस्य गणों में पधारकर आग्रहपूर्ण विनंती है| स्वीकृति मिलते ही सभी संघो ने अपने वहां आयोजन हेतु निवेदन किया, विशेष रूप से आहोर, भीनमाल, जालोर श्री संघ एवं बाकरा रोड तीर्थ पर पाटोतसाव हेतु आग्रह देखते हुए एक समिति बनायीं गयी, जिसमे सर्वसम्मति से बाकरा रोड तीर्थ पर पाटोत्सव मानाने का तय हुआ|
आपश्री जन्म आहोर में वि.सं. १९९४, फाल्गुन वद ३० को शा शेषमलजी फुआजी श्री श्रीमाल चंद्रावन गोत्रीय की धर्मपत्नी श्रीमती ऊर्जाबाई की वृक्षी से हुआ| आपका सांसारिक नाम घेवरचंद व प्रचलित नाम सूरजमल था| कर्मभूमि कल्याण (महाराष्ट्र) रही एवं आपका विवाह तीखी में श्रीमती सुटमीबाई के साथ हुआ| असार संसार त्याग की भावना प्रबल होने पर भी आपको प्रवज्या हेतु काफी समय संघर्ष करना पड़ा| अंत: वि.सं. २०३४ श्रावण सूद १४ को राजगढ़(म.प्र.) में कवीरत्न आचार्यश्री विधाचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के शुभ हस्तों से दीक्षित हुए एवं उनके शिष्य के रूप में आपका नाम जयानंद विजय रखा गया| बड़ी दीक्षा कार्तिक सूद १० को मोहनखेड़ा में संपन्न हुई| दीक्षा के बाद विधागुरु के रूप में आगमज्ञ मुनिराज श्री रामचंद्रविजयजी म.सा. के सानिध्य में रहकर आपने आगमों का अध्ययन किया|
जैन शासन में आप विशुद्ध संयमी एवं शुद्ध क्रिया पालक के रूप में माने जाते है| आपके शुभ हस्तों से अब तक ५३ मुमुक्षु आत्माये दीक्षित हो चुकी है| जिन शासन प्रभावना में ३९ उपधानतप, २७ छ’री पालित संघ, ८ नव्वाणु यात्रा, १४ अंजनशलाका प्रतिष्ठाये, आदि कई अनुष्ठान आपकी पावन निश्रा में संपन्न हो चुके है|
आपश्री आचार्य श्री विधाचंद्र सूरीश्वरजी म.सा. के पट्टधर के रूप में आचार्यपद पर बिराजमान होंगे| पाटोत्सव समारोह सह पंचाहिन्का मोहत्सव ८ जून से प्रारम्भ होगा| आचार्य पड़ारोहण के समाचार से गुरुभक्तों में खुशियों की लहर छा गयी है| इस अवसर पर मुंबई से विशेष यात्री ट्रेन की व्यवस्था की गयी है|
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