भाईन्दर की धर्मभूमि पर रचा इतिहास,प.पू. गच्छाधिपति श्री धर्मधूरंधरसूरीश्वरजी म.सा. का भव्य प्रवेश

भाईन्दर : आषाढ़ सुदी दशम, दिनांक २६.७.२०१५, रविवार को प्रात: ८:३० बजे, पूज्य श्री जी आदि साधू-साध्वीवृन्द का भव्य चातुर्मासिक प्रवेश बालचंद दर्शन से वरघोडा प्रारम्भ हुआ| सबसे पहले स्थानिक पाठशाला के विद्यार्थी जैन ध्वज को लेकर चल रहे थे| प्रताप बैंड, ठाणे का गुरु वल्लभ बैंड व मलाड का श्री शांतिनाथ जैन बैंड अपनी सुम्धुर्क ध्वसियों के साथ वरघोडा की गरिमा में उत्साह बढा रहे थे| वरघोडा नगर भ्रमण करते हुए बावन जिनालय पंहुचा| वहां नगर भ्रमण करते हुए बावन जिनालय पंहुचा| वहां चातुर्मासार्थ बिराजित आचार्य भगवंत श्रीमद् सागरचन्द्र सागर सूरी श्वर्जी म.सा. अपने शिष्यवृन्द के साथ पूज्य श्री जी बावन जिनालय के प्रवचन मंडप में पधारे|
वहां पर पूज्य श्री जी ने मांगलिक के साथ हित शिक्षा रूपी प्रवचन भी दिया| वरघोडा आगे बीच मार्ग में ९० फीट रोड का नाम “श्री सीमंधर स्वामी मार्ग का अनावरण के बाद वरघोडा जिन मंदिर के दर्शन करके वल्लभ नगरी के विशाल सभा मंडप में पंहुचा| हजारों की मेदनी के बीच पूज्य श्री जी आदि साधू साध्वीवृन्द चल रहे थे| मेघराजा ने भी मोहर बनाए रखी| जैसे ही वरघोडा सभा मंडप पहुचा, मेघराजा बरसने लगे| गच्छाधिपति पद पर आसीन होने के बाद यह प्रथम चातुर्मास पूज्य श्री जी का भायंदर में होने जा रहा है|जहाँ-जहाँ वरघोडा आगे बढ़ रहा था बीच मार्ग में हजारों की तादाद में महानुभावगन पूज्य श्री जी का आशीर्वाद ले रहे थे|


पूज्य श्री जी के मंगलचरण के पश्चात् श्री अनिल गेमावत ने स्वागत गीत गाया| स्थानिक पाठशाळा के बच्चों ने नृत्यु के साथ भजन प्रस्तुत किया| श्री संघ की ओर से गुरु वल्लभ की प्रतिमा पर वासक्षेप पूजा की गई व उनके समक्ष दीप प्रज्जवलित किया गया|
पूज्य श्री जी ने प्रवचन में कहाँ – जीवन के सफलता का रहस्य केवल वीतराग दशा को प्राप्त करने में समाहित है| राग से विराग और विराग से वीतराग पथ पर अग्रगामी बनना ही हमारा लक्ष है|

वीतराग एक बहुत ऊँची भूमिका है, उसकी प्राप्ति अत्यंत पुरुषार्थ से ही संभव बनती है| यह दिखावे या प्रदर्शन की भूमिका नहीं है, आत्मोन्नति की सर्वोच्च भूमिका है| इसलिए धर्म पर कर्तव्य निष्ठ रहने वाला ही सच्चा धार्मिक है| कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहता है वह स्वत: ही आगे बदग जाता है जिन धर्म के सिद्धांत समस्त मानवता तथा विश्व हित के लिए उपयोगी है| इनका उद्येश विशाल और विराट है|जो अपने जीवन में बहुआयामी विकास की प्रेरणा देता है| इस चातुर्मास के अंतगर्त जिन धर्म के सद गुणमय आचार-विचारों की सुगंध अपने जीवन में व जन-जन के जीवन में ओत-प्रोत करना है| जिन धर्म के स्वरुप को जानें, पहचाने और जीवन में उतारकर कल्याण मार्ग की ओर अग्रसर बने|
इस ऐतिहासिक चातुर्मास प्रवेश पर भारतभर के अनेक शहरों, नगरों,गावों से हजारों की संख्या में महानुभाव पधारे| इस शुभ अवसर पर ठाणे-भायंदर के सांसद राजन विचारे, स्थानिक विधायक नरेन्द्र मेहता, महापौर गीता जैन, सभागृह नेता व नगर सेवक श्री सुरेशजी खंडेलवाल, नगर सेवक मिलन पाटिल के साथ कई जानी मानी हस्तियां व मीडिया विभाग के कई पत्रकार बंधु पधारे थे|

विशेष-इस शुभ शिरोमणि संघ लुधियाना के अध्यक्ष श्री काश्मीरी लाल जी बरड आदि ट्रस्टीगणों व संघ के महानुभावों ने अगले वर्षय(सन २०१६) का चातुर्मास लुधियाना हो, उसके लिए पूज्य श्री जी से विनंती की|
पूज्य श्री जी की काम्बली सभागृह के नेता व नगर सेवक श्री सुरेश जी खंडेलवाल ने वोहराई| इस भव्य ऐतिहासिक प्रवेश को सफल बनाने के लिए श्री पार्श्व-प्रेम युवक मंडल, श्री पार्श्व प्रेम महिला मंडल, श्री पार्श्व प्रेम बालिक मण्डल, श्री मन मोहक ग्रुप. मुंडारा-मुंबई, श्री वरकाना जैन मित्र मंडल, मुंबई श्री धर्मधूरंधर सूरी भक्त मंडल, मुंबई का आहार्दिक सहयोग रहा| जिसके कारण यह कार्यक्रम सफल बना|

