जय जिनेन्द्र सेवा संघ(पुणे) द्वारा आयोजित श्री गिरिराज से गिरनार
छ:री पालित संघ की ऐतिहासिक पूर्णता

पुणे : इस संस्था के मुख्य कर्णधार – संस्थापक अध्यक्ष संघवी विमलचंद आनंदराजजी वेदमुथा,(मरुधर – भूति) द्वारा सन २०१३ के श्री अयोध्यापुरम से पालीताणा छ:रीपालित संघ माल के दिन राखी गई नींव ने, पुरे तीन साल के अखंड परिश्रम से, संघठन ने ऐतिहासिक सफलता हासिल करते हुए इतिहास के सुनहरे पन्नों पर स्वर्ण अक्षरों से नई मिसाल कायम की| भारत में किसी संघठन द्वारा १८ दिवसीय छ:रीपालित संघ का इतने विशाल पैमाने में आयोजन पहली बार संपन्न हुआ|
२ गच्छाधीपति, ११ आचार्य, ३६ साधु एवं १६० साध्वीजी की भव्यतम निश्रा सानिध्य “विविध गच्छ-पंथ की एक मंच पर एकता की मिसाल” ७०० यात्रीको, ६०० स्टाफ, विविध कलाकारों की अनोखी प्रस्तुति, मुख्य संघवी श्री दिलीपजी कितावत सह २३ सहयोगी संघपतियों का विशेष योगदान, ” भव्य प्रवेश द्वार, कलात्मक प्रवचन स्टेज, रंग-बिरंगी टेंट नगरी” १८ दिवसीय संघ में अनेक प्रसिद्ध संगीतकारों की भक्ति रमझट की तैयारी की गयी थी|

प.पू. गच्छाधिपति श्री अभयदेवसूरीजी म.सा.(डेहलावाला) की पावन प्रेरणा से आयोजित इस संघ में पू.आ. श्री यशोभद्रसूरीजी , पू.आ.श्री पियुषभद्रसूरीजी (डेहलावाला), पू. गच्छाधीपति आ. श्री दौलतसागरसूरीजी, पू. आ. श्री नंदीवर्धन सागरसूरीजी, पू.आ. श्री नरदेव सागर सूरीजी , पू.श्री हर्षसागार्सुरीजी म.सा., पू. बुद्धिसागर समुदायवर्ती पू. आ. श्री वर्धमान सागरसूरीजी , पू. रामचंद्रसूरीजी समुदायवर्ती पू.आ. श्री युगचन्द्रसूरीजी, पू.नीति समुदायवर्ती पू.आ. श्री ललितप्रभसूरीजी, पू.आ.श्री रविरत्नसूरीजी, आ. ठा. खरतरगच्छ पू.मु.सही मणिरत्नविजयजी म.सा., पू.मु.श्री दर्शनरत्नविजयजी, त्रिस्तुतिक समुदायवर्ती पू. मु. श्री हितेशचन्द्र विजयजी सह चारो फिरको के अनेक अनेक मुनिभगवंत १६० के करीब विविध गच्छो की साध्वीजी भगवंत तथा ७०० आराधक श्रावक-श्राविकाओं, मुमुक्षुरत्न, तपस्वीरत्न के साथ पावनतम श्री गिरिराज से गिरनार छ:रीपालित संघ ने “न भूतो न भविष्यति” ऐतिहासिक इतिहास रचने वाली अपनी महानतम यात्रा सफलतापूर्व पूर्ण की|
आयोजन कर्ता संस्था” जय जिनेन्द्र सेवा संघ, पुणे” अपना एक अलग ही स्थान रखती है| हर बार कुछ नया देने का प्रयास, संस्था की मुख्य पहचान है| संस्था के मुख्या कर्णधार-संस्थापक अध्यक्ष संघवी विमलचंद आनंदराजजी वेदमुथा मरुधर में भूति, हाल पुन संस्था के उर्जास्तोत्र है| अपनी दूर दृष्टी व सूझ-बुझ में उपरोक्त संघों का कुशल नेतृत्व द्वारा ऐतिहासिक सफलता अर्जित की|

गिरिराज से गिरनार संघ के चतुर्विध संघ ने दिनांक ३.२.२०१६ की गिरिराज की यात्रा की व दिनांक ४ फ़रवरी २०१६ को प्रात: ३.१५ बजे संघ का प्रारम्भ, ९:१५ बजे पालीताना स्तिथ मेवाड़ भवन में संघपतियों का सह पत्नी राज तिलक से सम्मान कर, निश्रादाता, गुरुभगवंतों के अलावा, पू. गच्छाधिपति (नीति समुदाय) आ. श्री हेमप्रभसूरीजी म.सा. , पू. वल्लभसमुदायवर्ती, पू. गच्छाधिपति आ. श्री नित्यानंदसूरीजी, पू. आ. श्री वसंतसूरीजी, गिरिविहर के पू. गच्छाधिपति आ. श्री हेमप्रभसूरीजी म.सा.,पू.आ. श्री राजशेखरसूरीजी ,पू.आ. श्री अजित शेखरसूरीजी म.सा. ,पू. आ. श्री अशोकसागरसूरीजी, पू. आ. श्री रविरत्नसूरीजी आदि अनेकों आचार्यो, पंन्यास प्रवर, मुनिभगवंतों, साध्वीजी भगवंतों की उपस्थित उल्लेखनीय रही| मुख्य संघवी श्री दिलीपजी कितावत व प्रवचन मंडप लाभार्थी श्री गजराजजी नागोरी ने हरी झंडी बताकर संघ का विधिवत प्रस्थान करवाया| पूर्ण लावाजे यानी हाथी, घोडा, ऊँट, बैंड-बाजे, विविध झांकियां, शंकवादक, राजस्थानी ढोल थाली, नासिक ढोल थाली, शेहनाई वादक, पंजाब भटिंडा बंद, काटियावाड़ी रास मंडली आदि ने समा बांध दिया| मिनी ड्रोन हेलिकॉप्टर ने पुष्पवर्षा की|

पहले पड़ाव श्री शत्रुंजय डेम तीर्थ विशाल प्रवेश द्वार पर मुख्य संघवन सौ. वसंतवाला दिलीपजी कितावत सह गोडवाड़ महिला मंडल, मुंबई की महिलाओं ने कलश-गहुली से अगवानी की| दुसरे दिन श्री कदमगिरी तीर्थ की सभी ने पाहड यात्रा की| अगले पड़ाव जेसर पर संघ स्वागत सह २ जिनालय के दर्शन वंदन के बाद दुसरे दिन मोटा भमोदरा के श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ जिनालय द्वारा भावभीना स्वागत व संघ पूजन संपन्न हुआ| अगले दिन पियावा में दर्शन के बाद संघ पढाव पर अनेकों कार्यक्रम हुए|
दोपहर प्रवचन मंडप में विशेष रूप में आमंत्रित “संकित ग्रुप” मुंबई ने गिरनार तीर्थ की भावयात्रा सह नाटिका के द्वारा सभी का मन मोह लिया|
माघ सूद १ के दिन सावर-कुंडला श्री संघने जबरदस्त लवाजे के साथ नगर प्रवेश पर स्वागत किया| जहाँ सभा में मंगलाचरण के बाद श्री संघ ने मुख्य संघवी परिवार व संघटन के संस्थापक अध्यक्ष श्री विमलजी संघवी का अध्यक्ष श्री नवीनभाई के हाथों सम्मान किया गया| संघ द्वारा ३६ हजार रु. साधारण खातें व २५ हजार रु. जीवदया खाते में लिखवाकर लाभ लिया| बेसते महीने की एकम पर पू. गच्छाधिपति आ. श्री अभयदेवसूरीजी के महामांगलिक पर भारत वर्ष से एक हजार से अधीक भक्त पधारे, इस अवसर पर सभी आचार्यों का कांबली वोहारने का लाभ श्री मनोहरलालजी परमार (संदेराव-चेन्नई) ने लिया| हर पड़ाव पर भूमि प्रदाता परिवार का सोने की चैन, मोमेंटो, शाल ,श्रीफल, हार तिलक से परिवार का बहुमान किया गया| आगे चलला चतरिया पाटिया पड़ाव पर विविध कार्यक्रम में संपन्न हुए|

माघ सुद ५ (वसंत पंचमी) दिनांक १२ फ़रवरी २०१५ के दिन मालसौका नगर के पड़ाव पर अनोखे कार्यक्रम का आयोजन हुआ| आगम पट्टारक् प.पू. गच्छाधिपति श्री सागरनन्दसूरीजी म. सा. के १२५वे दीक्षा एवं प.पू. आ. श्री संयम प्रभावक श्री सुरेंद्रसूरीजी के १०३ ने दीक्षा दिन, तथा आचार्य प्रभावक, पू. आ. श्री रामसूरीश्वर्जी(डेहलावाला) के १००वे (शताब्दी वर्ष) जनम दिन, सरल स्वाभावि पू. आ. श्री वर्धमान सागरजी के १५वे ” आचार्य पदवी” दिन के उपलक्ष में गुनवाद सभा, के साथ साथ प्रभु श्री आदिनाथजी, श्री शांतिनाथजी, श्री नेमिनाथजी की रजत प्रतिमाओं का निर्माण पंडाल में सबके समक्ष किया गया|
आज रोज आयम्बिल तप के ४०० तपस्वियों का २५० रुपये प्रभावना से बहुमान व सामायिक आराधकों का ५० रुपये से बहुमान किया गया| सभा उपरांत जय जिनेन्द्र सेवा संघ, पुणे द्वारा संघ के साथ रहे ३० ऊँटो,१० बैल, ६ घोड़ो व एक हाथी को ,अनुकंपा जीवदय तहत , लापसी गुड, हरे चारे द्वारा स्वामीवात्सल्य का लाभ लिया गया|

उज्जैन से पधारे हुए डॉ संतोषजी जैन, राणापुर (म.प्र.) से पधारे श्री मनोहरजी जैन व भोर के श्री शांतिनाथ जैन युवा मंडल ने जय जिनेन्द्र सेवा संघ, पुणे के संस्थापक अध्यक्ष श्री संघवी विमलजी आनंदराजजी वेदमुथा(भूति-पुणे) का “सम्मान-पत्र” शाल, श्रीफल के सन्मान आदि ने भी सन्मान किया|
आगामी संघ की घोषणा करते हुए श्री विमलजी संघवी ने सन २०१७ में चैत्र मॉस की नवपद ओली आराधना के साथ बावन जिनालय स्वरुप ५२ तीर्थों की यात्रा सिरोही जिले(राज.) में करवायी जायेगी एवं सन २०१८ में प्राचीन परमानुसार राजनगर से शंखेश्वर छ:रीपालित संघ के आयोजन की भावना व्यक्त की|

श्री विमलजी संघवी ने आज सभी दानवीर संघवी परिवार सहयोगी परिवार संस्थाओं के साथ विशेष रूप से यात्रिकों में मिच्छामी दुक्कडम देते हुए उन्हें सेवा का मौका देने हेतु अभिनंदन करते हुए आभार व्यक्त किया| इसी के साथ संघ समापन की मंगलाचरण के साथ घोषणा हुई|
