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ऐतिहासिक “जीवित मोहत्सव”

 

बेंगलुरु में राणावत परिवार ने मनाया ऐतिहासिक “जीवित मोहत्सव”

मिश्रीमल-धाकुबाई राणावत का जीवित मोहत्सव शाही अंदाज में

 

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बेंगलुरु : जिनशासन के प्रति समर्पित दुजाना निवासी नरपतकुमार, महेंद्रकुमार, मुकेशकुमार राणावत परिवार ने शुक्रवार को पैलेस ग्राउंड स्तिथ ओम श्रंगार सभागार में अपने माता-पिता मिश्रीमल-धाकुबाई राणावत का जीवित मोहत्सव शाही अंदाज में मनाया| शहर में पहला जीवित मोहत्सव था जिसमे मुंबई-बेंगलुरु का समावेश देखने को मिला| सभागार में उपस्थित मेहमानों ने बताया की ऐसा ऐतिहासिक “जीवित मोहत्सव” बेंगलुरु में पहले कभी नहीं हुआ|

जीवित मोहत्सव के दौरान उधापन सह रत्नत्रई मोहत्सव का शुभारंभ  प.पू. लब्धि भुवनतिलक सूरी पट्ठालंकार, गच्छाधिपति प.पू.आ.देव श्री अशोकरत्नसूरीश्वर्जी म.सा., प.पू.आ.देव श्री अमरसेन सूरीश्वर्जी म.सा., प.पू.मुनिराज श्री अजितसेनविजयजी म.सा. आदि ठाणा की मुनिसुव्रत-राजेंद्र जिनमंदिर में बुधवार महासुदी १ को स्नात्र पूजा एवं उवसग्गहरं महापूजन के साथ शुरू हुआ| गुरूवार महासुदी २ को श्री गोडवाड भवन में प्रात: स्नात्र पूजा एवं श्री सिद्धचक्र महापूजन रखा गया| शुक्रवार महासुदी ३ को प्रात: श्री मुनिसुव्रत-राजेंद्र जिनमंदिर में स्नात्र व सत्तरभेदी पूजा पढ़ाई गई एवं पैलेस ग्राउंड स्थित ओम श्रृंगार पैलेस के प्रवेश द्वार से सभागार तक राणावत दम्पति का ऐतिहासिक वरघोडा निकाला गया| वरघोडे में एक रथ में मिश्रीमल-धाकुबाई राणावत एवं दुसरे रथ में पन्नालाल राणावत सवार थे| गाजे बाजे एवं नेवी बैंड के साथ राणावत दम्पति का फूलों की बौछारो के साथ सभागार में प्रवेश हुआ|

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राणावत परिवार द्वारा आयोजित इस ऐतिहासिक जीवित मोहत्सव का विधि-विधान विधिकारक सुरेन्द्रगुरु एवं विमलभाई ने किया| मोहत्सव के अंतिम दिन समारोह का संचालन राहुल कपूर ने किया| आबुरोड से आए संगीतकार जगदीश आचार्य एवं भावना आचार्य ने माता-पिता के प्रति श्रद्धा से ओत-प्रोत भक्ति गीतों का समा बांधा जिसे उपस्थित लोगो ने खुब सराहा| मोहत्सव में कई बार ऐसे पल आए जिसमे मिश्रीमल राणावत व उनकी धर्मपत्नी धाकुबाई राणावत एवं उनके पुत्र-पुत्रीयो सहित उनके परिजनों की आंखो से आंसू छलक पड़े, इतना ही नहीं उपस्थित जनमेदनी में काफी लोग भी भाव विभोर हो कर आंसू पौछते नजर आए| मोहत्सव इतना अच्छा था जिसके परिणाम स्वरुप लोग काफी समय तक निहारते रहे हिले तक नहीं|

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मोहत्सव में राजनेता, एवं समाज की चीर-परिचित हस्तियो सहित कई गनमान्य लोग शरीक हुए| इस अवसर पर राणावत परिवार की ओर से मुंबई से आए उनके बड़े भाई पन्नालाल राणावत, जयपुर से आए सम्पतलाल जैन, विधिकारक सुरेन्द्रगुरु एवं पंडित चन्द्रशेखर सहित कई विशिष्ठ लोगो का सम्मान किया गया| इस मौके पर गोडवाड भवन ट्रस्ट सहित अनेक संस्थाओं, रिश्तेदार एवं काफी लोगों ने राणावत दम्पति का सम्मान कर उन्हें तहदिल से शुभकामनाए दी|

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ज्ञातव्य है की श्री मिश्रीमलजी राणावत का जीवन काफी संघर्षमय रहा मगर उनके चेहरे पर मुस्कान हमेशा सदाबहार रही जो आज भी उनके चेहरे पर झलकती है| संस्कृत में एक उक्ति है की उसी का जन्म सार्थक है जिसके द्वारा उसका वंश उन्नति करता है – स:जातो ऐन जातेन वंशो याति समुन्नतिम्| श्री मिश्रीमलजी राणावत के संबध में संस्कृत की उपयूक्त उक्ति अक्षरक्ष:सार्थक हो रही है| कहते है स्वामीमान, आत्मज्ञान व आत्मसंयम यह तीन ही जीवन को अलौकिक शक्ति की ओर ले जाते है और समय समय पर कुछ ऐसी विभूतियो का अवीभार्व होता है जो अनवरत रूप से जिनशासन की सेवा में लीन रहती है और सेवा करती ही रहती है| ठीक उसी तरह श्री मिश्रीमलजी राणावत का भी जीवन है| वैसे तो विश्व के रंग मंच पर प्रतिदिन हजारो व्यक्ति जन्म लेते है मगर उनका कोई लेखा जोखा नहीं होता| किन्तु राणावत दम्पति अपने सरल स्वभाव एवं देव गुरु धर्म के प्रति श्रद्धा के माध्यम से अपने आत्म-कल्याण के साथ सभी का पथ आलोकित कर अपना जीवन धन्य बनाने में लगे हुए है| सरल स्वभावी,जिनशासन प्रेमी श्री राणावत का स्वभाव जल की भाँती निर्मल एवं वाणी में माधुर्यता लिए सदा रहता है जब किसी भी व्यक्ति से मिले तब मिलने वाले को ऐसा लगता है की वे उनके पहले भी मिल चुके है| मिश्रीमलजी राणावत अपने गांव दुजाणा, टिपटूर व् बेंगलुरु सहित दूर-दराज के क्षेत्रों में काफी शासन प्रभावक कार्य किए है व् हमेशा आचार्य व साधु-संतो के निकटस्थ उनका परिवार रहता है| अनेक मंदिरों व् सामाजिक कार्य में तन-मन व धन से सहयोग देकर अपने एक अमिट छाप छोड़ रखी है| आप में व्यापार कौशल की अपूर्व प्रतिभा इस उम्र के पड़ाव में भी बरक़रार है जिसके फलस्वरुप आपके परिवार में सुकृत लक्ष्मी का अर्जन हमेशा होते रहता है और विपुल धन राशि को बड़ी उदारता के साथ आप जीन शासन के कार्य में लगाते रहते है| आपने जिन विषम परिस्थितियो में अपने जीवन का प्रारंभ किया और उसके पश्चात् अपने उधमी चरित्र की झांकी दिखलाकर आज की रुग्नप्राय मानवता के लिए एक प्रकाश स्तंभ का कार्य किया है, जिसके आलोक में वर्तमान और आने वाली पीढ़िया लाभावन्ति हुए बिना नहीं रह सकती |