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सुराणा कुल की कुलदेवी माँ सुसवाणी की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न

सुराणा कुल की कुलदेवी माँ सुसवाणी की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न

बैंगलोर : बैंगलोर स्थित होसूर रोड पर माँ सुसवाणी के नवनिर्मित माताजी धाम में दिनांक १४ दिसंबर २०१६ को विधि-विधान से पांच देवी प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा वैदिक मंत्रोचार के साथ संपन्न हुई| सुराणा कुल की कुलदेवी माँ सुसवाणी सहित अंबामाता, सच्चियाय माता, पद्मावती माता लक्ष्मी माता की प्रतिमाएं प्रतिष्ठापित होते ही उपस्तिथ जनों ने बधाइयो का दौर शुरू हो गया| उपस्थित सभी जनों ने प्रसन्नतापूर्वक भक्तिमय वातावरण में माँ से अपना कुल, समाज राष्ट्र एवं समस्त भूमंडल की खुशहाली की कामना की| श्रीमती भंवरीबाई घेवरचंदजी सुराणा चैरिटेबल ट्रस्ट एवं सुराणा संघ के तत्वाधान में मंदिर का निर्माण सुराणा परिवार द्वारा ही संपन्न कराया गया|

इसी क्रम में पांच दिवसीय इस भव्य दिव्य मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा प्रसंग के तहत १४ दिसंबर, बुधवार की प्रात: छह बजे पार्श्व सुशिल धाम में विराजित सुसवाणी धाम में मुहरत प्रदाता आचार्य श्री अशोकरत्नसूरीश्वर्जी व अमरसेनसूरीश्वर्जी म.सा. से आशीर्वाद लेकर दिलीप सुराणा व आनंद सुराणा ने सपत्नीक धार्मिक अनुष्ठान शुरू कराया| आचार्य पं. चन्द्रशेखर शर्मा व अन्य विधान पंडितों ने विभिन्न प्रतिमाओं की विधिवत पूजा कर स्थापना करवाई तथा लाभार्थी परिवार द्वारा मंदिर के शिखर पर कलश स्थापना व ध्वजारोहण किया गया| इस दौरान हेलीकाप्टर से पुष्प वर्षा अनूठा आकर्षण बन गई| प्रकाण्ड विधान एवं आचार्य पंडित चन्द्रशेखर शर्मा के सान्निध्य में २५ विप्रो में विभिन्न कार्यक्रमों में १०८ गणपति के व १०० चंडीपाठ तथा रुद्रापारायण संपन्न करवाए |

इसमें हवन में आहुतियाँ व नौ कुंवारी कन्याओं का पूजन, आरती व १०८ दीपों से माँ सुसवाणी माता की महाआरती शामिल थी| सुस्वाणी माता को छप्पन भोग भी अर्पण किया गया| तत्पश्चात माँ के दर्शनार्थ श्रधालुओ की लम्बी कतार लग गई जो करीब तीन घंटों तक सुचारू रूप से चलती रही| स्थानीय सुराणा संघ, सुराणा महासंघ, बालराई जैन संघ व अनेक संघो व संगोठनो द्वारा श्रीमती भंवरीबाई घेवरचंद दिलीप-आनंद सुराणा परिवार द्वारा मंदिर निर्माण व प्रतिष्ठा करवाने के अनुमोदनार्थ उनका अभिनंदन सम्मान किया गया|

उल्लेखनीय है की गुजरात प्रांत के वंशीपहाड़ के लाल पत्थर से निर्मित इस मंदिर में प्रतिष्ठापित पांचो देवियों की मनोरम प्रतिमाएं जयपुर से बनवाकर मंगवाई गई है| माँ सुसवाणी व माँ लक्ष्मी की पप्रतिमा स्थापना मंदिर निर्माणक शा भंवरीबाई घेवरचंदजी सुराणा के द्वय पुत्र दिलीप सुराणा व आनंद सुराणा परिवार द्वारा किया गया| जब की अम्बा माता की स्थापना शांतिलालजी, संजय, अजय सांड परिवार द्वारा, पद्मावती देवी की प्रतिमा पियूष जैन,प्रमोद जैन, दिलीप पुनमिया परिवार द्वाराद्वारा वैदिक मंत्रोश्रारण के साथ प्राण प्रतिष्ठापित की गई| सुसवाणी माँ के मूल धाम मोरखाणा व माउंट आबू स्थित माँ अंबा के धाम से वहा दोनों परिवारों द्वारा ज्योत भी लाइ गई, जो अखंड जलेगी |

समस्त धार्मिक अनुष्ठान की क्रियाओं की पूर्णहुती से पूर्व शाही करबा, ब्रह्मभोज व विशाल महाप्रसादी का आयोजन भी हुआ|

कार्यक्रम में शहर के अनेक गणमान्य व्यक्तियों सहित राजस्थान,हैदराबाद,चेन्नई,मुंबई,कोलकाता से भी श्रद्धालुओ बड़ी संख्या में शिरक्त करने पहुंचे थे| पार्श्व सुशिल धाम व सुसवाणी मंदिर के बीच लोगों के आवागमन से पुरे माहोल में उत्साह छाया रहा और ऐसा लगा रहा था मानो कोई धार्मिक मेला लगा हो| सुराणा संघ के चेयरमैन दिलीप सुराणा, अध्यक्ष सरदारमल सुराणा, उपाध्यक्ष अशोक सुराणा, विजयराज सुराणा, एसवी सुराणा, महामंत्री महिपाल सुराणा , कोषाध्यक्ष कन्हैयालाल सुराणा, सहमंत्री नरेन्द्र सुराणा, भीमराज सुराणा, प्रचार मंत्री उत्तमचंद सुराणा, संघटन मंत्री सुनील सुराणा पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र सुराणा आदि पदाधिकारियों सहित अनेक सदस्यों ने प्रतिष्ठा की विभिन्न व्यवस्थाओं में सहयोग दिया| अगले दिन १५ दिसंबर की सुबह मौके प्रथम दर्शनार्थ धाम के भव्य द्वार का उद्घाटन किया गया था|