राष्ट्रसंत आचार्यश्री चंद्राननसागरसूरीश्वरजी म.सा. डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित
आगामी २०१७ का चातुर्मास श्री गोडीजी जैन संघ में होने की घोषणा

मुंबई : पार्श्वनाथ जिनालय , मुलुंड की पावन धन्यधरा पर सागर समुदाय के गच्छाधीपति दादा गुरुदेव श्री दर्शनसागरसूरीश्वरजी म.सा. २३वीं पुण्यतिथि एवं उनके द्वारा प्रदत बड़ी महामांगलिक के समारोह में राष्ट्रसंत आचर्यश्री चंद्राननसागर सूरीश्वरजी म.सा. को यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका (U.S.A.) के चांसलर डॉ. सवेन कुमार एवं डॉ. प्रकाशन एजुकेशनल कैबिनेट की अभिशंषा पर डॉक्टरेट की उपाधि की घोषणा डॉ. प्रकाशन-कर्नाटक द्वारा की गयी|

आचार्यश्री ने उपाधि प्रदाता का आभार जताते हुए दादा गुरुदेव के जीवन परिचय व तपाराधनाओं का बखान करते हुए सभी जैन संघ/संस्थाओं को एजुकेट होने का आवाहन करते हुए प्रेरणा दी की सामाजिक अवं राजनितिक क्षेत्र में जैन धर्मप्रेमियों को सहयोग करे , चाहे वो जैन हो या अजैन|जैन समाज के अग्रिनियों को प्रेरणा देते हुए कहा की शिक्षा, चिकित्सा, महिला कल्याण योजानओं के विकास के लिए आगे आये|

बालमुनिश्रीजी मननचंद्रसागरजी म.सा. ने गुरु महत्ता बताई| इस मंगलमय वेला में पंन्यासप्रवरश्रीजी गुनचंद्रसागरजी म.सा., मुनिश्री हरीशचंद्रसागरजी म.सा. , मुनिश्री पुष्पचंद्रसागरजी म.सा. , मुनिश्री जैनेशचंद्रसागरजी म.सा. , मुनिश्री मननचंद्रसागरजी म.सा. , एवं विदुषी साध्वीजी कल्पिताश्रीजी म.सा., साध्वीजी चारुताश्रीजी म.सा., साध्वीजी आशिताश्रीजी म.सा., साध्वीजी ऋषिताश्रीजी म.सा. का पावन सानिध्य रहा|

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम की शुरुआत “गुरूजी अमरो अंतर्नाथ, अमने आपो आशीर्वाद” के उद्घोष व मंगलाचरण एवं दादा गुरुदेवश्रीजी की प्रतिमा के समुख सम्मानित श्रावक रत्नों, सर्वोदय पार्श्वनाथ जिनालय एवं नाकोडा भैरव दर्शन धाम महातीर्थ ट्रस्ट मंडल , लाभार्थी परिवार एवं अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन और माल्यापर्ण किया गया|


तत्पश्चात श्री मोतीलालजी ओसवाल , श्री शैलेशजी झवेरी , श्री किरणराजजी लोढ़ा, श्री जयंतीजी राही, श्री बाबुलालजी बोहरा के अब तक के जीवन के सकृतों को विडियो फिल्म द्वारा दिखाकर ” आचार्य दर्शनसागरसूरीश्वर्जी सम्मान” से सम्मानित किया गया| इस प्रसंग पर विशेष रूप से ” श्री गोडिजी जैन संघ” ने २०१७ के चातुर्मास की विनंती की , जिसे सहर्ष भाव से गुरुदेवश्री ने स्वीकृति प्रदान की एवं चिरा बाज़ार जैन संघ को चातुर्मास विनंती स्वीकार कर मुनिश्री निपुणचंद्रसागरजी आदि ठाना के चातुर्मास की घोषणा की|

