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श्री हेमेन्द्रसूरीश्वर्जी म.सा.
श्री हेमेन्द्रसूरीश्वर्जी म.सा.
राजस्थान के जालोर जिले के बागरा गाँव में आपका जन्म वि.सं. १९६५ माघ कृष्ण ४ के दिन हुआ| पिता का नाम ज्ञानचन्दजी व माता का नाम उज्जमदेवी था| आप पोरवाल वंशीय थे| आपका नाम पूनमचंद था| मोहवश माता-पिता बालक पूनमचंद को साधू संघ से दूर रखने को कोशिश करते थे| लेकिन उनके मन में वैराग्य जा दीपक प्रज्वलित था| सांसारिक बंधनों को तोड़कर सिद्धशिरगनी की जन्म भीनमाल नगरी में वि.सं. १९९९ आषाढ़ सुद २ को दादा गुरुदेव श्री राजेन्द्रसूरीश्वर्जी म.सा. के शिष्यरत्न प.पू. मुनिराजश्री हर्षविजयजी म.सा. से भागवती प्रवज्या ग्रहण कर उनके शिष्य बने एवं मुनिराज श्री हेमचन्द्रविजयजी नामकरण हुआ| दीक्षा ग्रहण कर गुरुदेव के सानिध्य में रहकर अध्ययन में रूचि के उपरान्त आपका अधिकांश समय तप-त्याग एवं बालकों को शुभ संस्कार देने में जाता था|
चरित्र पालन के दोष न लगे जावे, उसका निरंतर ध्यान रखते हुए आपने मासक्ष्मन वर्षीतप, वीश्स्थानक तप अट्ठाई,नवपदजी ओली राष्ट्र संत शिरोमणि प्रदान की गई| मोहनखेड़ा तीर्थ विकास में आपके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है| श्राविकाओं की आराधना के लिये श्री संघ द्वारा विनंती करने पर किसी भी समुदाय की निश्रा में अनुष्ठान हो, आप अपनी साध्वीजी भगवंतों को भेजते थे| यह आपकी सरलता व निष्पक्षता का प्रतिक था| भीनमाल में सुविख्यात ७२ जिनालय आपकी प्रेरणा से बना है| मोहनखेड़ा में आचार्य विधाचंद्रसूरीश्वर्जी समाधि मंदिर की प्रतिष्ठा एवं अनेक जिनबिम्बों की अंजनशलाका आपके द्वारा संपन्न हुई| हर समय आप स्वाध्याय में रहे थे| सरल स्वभाविनी समता मूर्ति पूज्य गुरुणीजी मुक्तिश्रीजी को आपने प्रवर्तिनी पद प्रदान किया था| वि.सं. २०६० भाद्रव वद ५ को पालीताणा में आपका स्वर्गवास हुआ|
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