आपका जन्म धौलपुर (बुन्देलखंड) में कार्तिक सूद २, वि.सं. १९४० को हुआ| पिता का नाम राय साहब श्री ब्रजलालजी एवं माता का नाम चंपाकुंवर था| आपके दो भाई, दुलीचंद एवं किशोरीलाल एवं दो बहने – गंगाकुंवर एवं रमाकुंवर थी| आपका जन्म नाम रामरत्न था| वि.सं. १९४७ में अचानक माता अवं भाई किशोरीलाल का देहांत होने पर व्यथित वज्रलालजी धौलपुर छोड़कर परिवार सहित भोपाल में आ कर बस गए| सा वर्ष की उम्र में दिगंबर जैन पाठशाला में अध्ययन शुरू किया, दो वर्ष में ही कई ग्रन्थ कंठस्थ कर लिए थे| अद्धितीय मेधा संपन्न थे|
१९५२ में ब्रजलालजी का देहांत हो गया| भोपाल में ही मामा के घर रहने लगे| १९५३ के सिंहस्थ मेले में उज्जैन पहुंचे, वहाँ से मित्रों के साथ महिदपुर पहुंचे, वहां पर श्रीमद्विजय राजेंद्रसूरीश्वर्जी म.सा. मुनि मण्डल सह विराजमान थे| दो बालमुनि से पूर्व परिचय के कारण सरलता से गुरुदेव से बातें करने लगे| गुरुदेव की वैराग्य भरी वाणी सुन आपको वैराग्य प्रकट हुआ| साथ-साथ विहार कर खाचरुद पहुंचे| लगभग दो महीने बाद गुरु महाराज ने १९५४ आषाढ़ वद २ को रामरत्न को दीक्षा दी और नाम रखा मुनि यतीन्द्रविजय| १० वर्ष तक गुरु के साथ रहकर अध्ययन किया|
अपनी मृत्यु निक समझ गुरु देव ने “अभीधान राजेंद्र कोष” का कार्यभार दीप विजयजी और आपको सौंपा| उपाध्याय पद जेठ सुद ८ वि.सं. १९८० को जावरा में दिया गया| वि.सं. १९९५ वैशाख सुदी १० को आहोर में आचार्य पद दिया गया| आपने अनेक दीक्षाएं, प्रतिष्ठाएं और संघ इत्यादि शासन प्रभावक कार्य किए| आषाढ़ सुद ३ वि.सं. २०१० को मोहनखेड़ा में स्वर्गस्थ हुए|
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