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श्री विजयप्रमोदसूरीजी म.सा.

 

श्री विजयप्रमोदसूरीजी म.सा.

 

आपका जन्म गाँव डबोक (मेवाड़) में गौड़ब्रह्माण परमानन्दजी की धर्मपत्नी पार्वती देवी की कुक्षी में सं. १८५० में हुआ था| सं. १८६३ वैशाख सूद- ३ को दीक्षा ग्रहण की एवं सं. १८९३ जेठ सुद ५ को सुरिपद मिला| आप शास्त्र लेखन कला के प्रेमी थे और आपका अधिकतर समय इसमें ही प्रसार होता था| आपके अनेक हस्तलिखित ग्रन्थ आज भी उपलब्ध है| वृद्धावस्था में आपने आहोर में ही स्तिरथा की| सं. १९२४ में अपने शिष्य रत्न विजयजी को आचार्य पद दिया जो राजेंद्रसूरी नाम से प्रख्यात हुए| सं. १९३४ चैत्र वद अमावस आहोर में आपका स्वर्गवास हुआ|