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श्री विधानंदसूरीश्वर्जी म.सा.

 

श्री विधानंदसूरीश्वर्जी म.सा.

 

आचार्य श्री देवेन्द्रसूरीश्वर्जी म.सा. की वैराग्य भरी वाणी सुनकर विजापुर निवासी वीरधवल ने स्वयं के विवाह मंडप में ही अपने छोटे भाई भीमदेव के साथ आचार्य भ. के पास दीक्षा ग्रहण की और मुनि विधानंद एवं मुनि धर्मकीर्ति के नाम से जाहिर हुए| वि.सं. १३०४ में इनको आचार्य पदवी एवं मुनि धर्मकीर्ति म.सा. को उपाध्याय पदवी से अलंकृत किया गया| मंडप में देवों ने केसर वृष्टि की| गुरु के स्वर्गवास के ठीक १३ दिन बाद इनका भी स्वर्गमान हुआ| “विधानंद” नाम के सर्वोत्तम व्याकरण की रचना इनके द्वारा हुई|