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श्री केशरिया पार्श्वनाथ
श्री केशरिया पार्श्वनाथ – श्री भद्रावती तीर्थ
इस मंदिर के बारे में कहा जाता है की मंदिर प्रथम ईटो का बना व बाद में पथरो का बना था | वि. सं. १८३१ में जिनोर्द्वार होने के प्रमाण मिलते है | उसके पश्चात भी जिनोद्वार होने के उल्लेख है | भवय, चमत्कारिक , भक्तो की मनोकामनाए पूर्ण करने वाली इस प्रतिमा की प्राचीनता व इतिहास के बारे में अनेको मानयताए है | उनमे यह भी एक है की यह अलौकिक प्रतिमा बीसवे तीर्थंकर श्री मुनिसुव्रत्स्वामी भगवन के समय प्रतिवासुदेव लंकापति श्री रावण के यहां पूजित थी |
यह मारवाड़ में जैनों का मुख्य तीर्थ-स्थान है |यहा पर जैनेतर भी श्रद्धा व भक्ति पूर्वक हमेशा आते रहते है |भील समूदाय में प्रभु काला बाबा के नाम से प्रचलित है |यहां नई-नई चमत्कारिक घटनाओं का अनेको भक्तो द्वारा वर्णन किआ जाता है |भक्तगण जो भी भावनाए लेकर आते है उनकी ईच्छए पूर्ण होती है |यहा पर केशर चडाने की मानता सदीओ से चली आ रही है व अतयाधिक् मात्रा में केशर चढ़ती है |इसलिए प्रभु को केशरीयानाथ कहा जाता है |
ग़ाव के बाहर वृश्क के निचे एक देहरी में प्रभु की प्राचीन चरणपादुकाए है |कहा जाता है प्रभु की प्रतिमा यही से प्रकट हुई थी |मेले के दीन प्रभु की रथयात्रा यही पर संपूर्ण होती है | प्रभु-प्रतिमा की कला तो अवर्णनीय है ही, प्रभु का मुखमंडल इतना आकर्षक है की दर्शन मात्र में मनन प्रफूलित हो उठता है |श्री केशरीयाजी का यह बावन जिनालय दूर से ही अति ही सौमय प्रतीत होता है |
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