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श्री नवसारी पार्श्वनाथ

 

श्री नवसारी पार्श्वनाथ – वलसाड

 

आज से लगभग ७००० वर्ष पहले हुए तेजपाल मंत्रिश्वर सोपारक तीर्थ की यात्रा के लिए गए| वापस लौटते समय वे नवसारी आए और वहां की पवित्र भूमि को देखकर तेजपाल मंत्री ने ५२ जिनालय से युक्त भव्य जिनालय का निर्माण कराया और वहां पार्श्वनाथ प्रभु की प्रतिष्ठा की | कालक्रम से तेजपाल द्वारा निर्मित वह मंदिर तो मस्जिद के रूप में रूपांतरित हो गया, परन्तु आज भी नवसारी के भव्य मंदिर में लगभग वो ही प्रतिमा विधमान है|

ये नवसारी पार्श्वनाथ, चिंतामणि पार्श्वनाथ के रूप में भी प्रसिद्ध है|

श्री शुभशील गनी द्वारा रचित प्रबंध-पंचशती में नवसारी पार्श्वनाथ की अत्पति के संदर्भ में एक कींवदंती प्रसिद्ध है|

एक अधिष्ठायक देव ने आकर एक श्रावक को कहा, “उठो! इस भूमि के नीचे एक भव्य, जिन प्रतिमा रही हुई है, तुम उन्हें खोदकर प्रगट करो|”

स्वप्न से प्रसन्न हुए उस श्रावक ने भूमि खोदी और उसमे से भव्य प्रतिमा प्रगट हुई| और उस प्रतिमा को भव्य गगन चुंबी जिनालय में प्रतिष्टित की गई|