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श्री सोगठीया पार्श्वनाथ
श्री सोगठीया पार्श्वनाथ – नारलाई
गोडवाड की पंचतीर्थी नारलाई नगर में जेखल पर्वत के मूल में श्री सोगठीया पार्श्वनाथ प्रभु का शिखरबद्ध जिनालय है|
पार्श्वनाथ प्रभु की उंचाई २७” व चौड़ाई २३” है|
इस इतिहास प्रसीद्ध प्राचीन नगर के नागदपूरी, नडूलाई नडलड़ायिका आदि अनेक नाम प्रसिद्ध है| “विजय प्रशसित महाकाव्य” में कहा है की श्री कृष्ण के पुत्र प्रद्युम्नकुमार ने निकट के पर्वत पर मंदिर बनवाकर श्री नेमिनाथ प्रभु की प्रतिष्ठा कराई थी| इस पर्वत को “यादव टेकरी” भी कहते है| इसके ठीक सामने दूसरा पर्वत है, जिसे शत्रुंजय टेकरी कहा जाता है, जहाँ आदिनाथ का मंदिर है| ये दोनों पर्वत प्राचीन है, जिन्हें गिरनार व शत्रुंजयावतार भी कहा जाता है|
इस नगर में पू. आचार्य श्री यशोभद्रसूरीजी म.सा. एवं शिवभक्त तपेसर योगी के बीच कई बार शाश्त्रार्थ हुए थे और उसमे आचार्य यशोभद्रसूरीजी जीते थे|
एक शर्त के अनुसार आचार्य यशोभद्रसूरीजी म.सा. खेडनगर से श्री आदिनाथ का मंदिर व तपेसर योगी खेडनगर से महादेवजी के मंदिर को उठाकर नारलाई लाए थे| जो आज भी विधमान है|
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