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श्री उवसग्गहरं पार्श्वनाथ
श्री उवसग्गहरं पार्श्वनाथ – नगपूरा
मध्य प्रदेश के दुर्ग जिले में नगपुरा में उवसग्गहरं पार्श्वनाथ का भव्य जिनालय है| प्रतिमाजी श्याम वर्णीय ४७ इंच ऊँचे है| पार्श्वनाथ की परंपरा में हुए केशी गणधर ने प्रदेशी राजा को प्रतिबोध किया था, उस राजा ने पार्श्वनाथ प्रभु की iस प्रतिमा व मंदिर का निर्माण कराया था| कालक्रम से मंदिर ध्वस्त बना, किंतु उस प्रभावक प्रतिमा को देवता देवलोक में ले गए|
कलचूरी वंशज श्री गजसिंह जैन धर्म के प्रखर अनुनायी थे| उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर पद्मावती देवी ने वह प्रतिमा गजसिंह को भेंट दी| उन्होंने अपने जनपथ में जिनमन्दिर का निर्माण कराकर इसी प्रभु की प्रतिष्ठा की|
कालक्रम से मंदिर नष्ट हुआ, किन्तु यह प्रतिमा भूगर्भ में सुरक्षित रही|
भाग्योदय से कुछ वर्षोपूर्व उगना गाँव का ठाकुर कुंआ खुदवा रहा था|४४ फूंट खोदने के बाद वह खड्डा अचानक दूध से भर गया| सभी को आश्चार्य हुआ| इस चमत्कार की शोध करने पर जिन्दे सर्पो से लिपटी हुई जिनप्रतिमा प्राप्त हुई| प्रभु-दर्शन से सभी के आनंद का पार न रहा|
ठाकुर भुवनसिंह वह प्रतिमा देने के लिए तैयार हो गया| श्रावको ने उगना गाँव में जिन मंदिर बनाने का संकल्प किया| इसी बीच मंदिर निर्माण के मुख्य सूत्रधार को स्वप्न में दैवी संकेत हुआ की इस प्रतिमा को नगपूरा में नव निर्मित मंदिर में प्रतिष्टित किया जाय| अग्रणियो ने दैवी संकेत का स्वीकार किया| और आगे चलकर वहाँ अति विशाल व भव्य जिनमंदिर का निर्माण संपन्न हुआ|
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